Wednesday, 14 October 2015

भारतीय गौ रक्षा दल समस्त गौ पुत्रों एवं गौ भक्तों का सम्लित प्रयासों के लिए आवाहन कर रहा है। आओ सब मिलकर इस यज्ञ में आहुति डालें। सभी देश भक्त " हर हर गाय -घर घर गाय " का नारा बुलंद करें।



हर देश भक्त के ह्रदय में एक नारे को अंकित करने जा रहा हैं, भारतीय गौ रक्षा दल। वह नारा हैं 'हर हर गाय -घर घर गाय'। हमारी भारतीय सभ्यता दस हज़ार वर्षों पुरानी है। हमारें पूर्वजों ने ही संसार को मनुष्यता सिखाई। विज्ञानं का प्रारंभ हमारें ऋषियों ने ही किया था । पुराणिक काल में अनेक विज्ञानिक शोध हुए। जिन को आधार मान कर मनुष्य के लिए मानवीय मूल्यों का निधारण किया गया। तथा उनमें जीव हत्या को महा अपराध माना गया। तथा उसमे भी दूध देने वाले पशु की हत्या घोर अपराध मानी गयी। गाय पे हुए शोधों के कारण भारतीय जन-मानस ने गाय को गौ माता कह कर पूजना प्रारंभ किया। जो करूर मानव गौ मॉस खाते रहे उन्हें दानव अथवा राक्षस की संज्ञा दी गयी। इन ही दैत्यों का विनाश भरत खंड के बहुत बड़े भू-भाग से मर्यादा पुरषोतम श्री राम चन्द्र जी ने किया। और जब राम राज्य का उदय हुआ तो हिमालय से लेके लंका,महिलाका , बाली, इत्यादि सहस्त्रों द्वीपों और समस्त भरत खंड में गौ हत्या पर निषेद लगा। योगेश्वर श्री कृष्ण ने भी एक ऊँगली पर पहाड़ उठा कर गौ रक्षा की। गौ रक्षा का आदर्श स्थापित करने के कारण ही उन्हें गोविन्द कहा जाता हैं। समय समय पर आस्था के क्षितिज पर भारत वर्ष में अनेक क्रांतियाँ हुई। तथागत बुध , वर्धमान महावीर, आदि गुरु शंकराचार्य , रामानुजाचार्य , माधवाचार्य ,इत्यादि इत्यादि अनेक महापुरुषों ने भांति भांति की साधना - उपासना पद्धतियाँ भारत के जन मानस को सिखाई। उन सभी पंथो , मतों , सम्प्रदायों में गौ माता को पूजनीय और अराधनिये माना गया। कालांतर में इस भरत खंड पर अनेक आकर्मण हुए। यवन, शक, हूण,अहोम और मनक्या,इत्यादि ने जब यहाँ शासन करना चाहा तो 

स्थानीय परम्पराओं को अपनाया तथा गौ हत्या पर निषेद लगाया। फिर अरब आए ,तुर्क आए , अपनी सत्ता भारत पर स्थिर नहीं कर पाए। पठानो ने उन्हें हटा कर अपना शासन दिल्ली पर लाया और गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाया। फिर मुग़लों का आकर्मण हुआ। बाबर ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की। उसकी समझ में भी बात आई और उसने अपने बेटे हुमायूँ से कहा की यदि तुम्हें भारत पर राज करना हैं, तो गौ हत्या पर प्रतिबंध रखना पड़ेगा। इस का उलेख बाबर द्वारा रचित पुस्तक बाबरनामा में मिलता हैं। जब मुग़ल काल में क्रूरता की अति हो गयी तब भी गौ हत्या पर प्रतिबंध रहा। औरंगजेब जैसा महानीच भी सत्ता में रहते हुए भी , कभी गौ हत्या से प्रतिबंध नहीं हटा पाया।

भारत के अंतिम सम्राट बहादुर शाह ज़फर 2 ने भी अपने अंतिम फरमान में कहा की गौ हत्या भारत वर्ष में नहीं होनी चाहिए। परन्तु यह क्या हो रहा हैं, मोदी शासन में भारत बीफ निर्यात में प्रथम राष्ट्र का स्तर पा चूका हैं। हमारी इस 'पवित्र भारत भूमि में' प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों की संख्या में गाय और बैल काटे जाते हैं और हम इसके विरोध में अँगुली भी ना उठायें। 

समय समय पर गौ रक्षा हेतु कई अभियान चलते रहें हैं। क्या हिमाचल क्या केरल, हर प्रान्त में गौ रक्षा हेतु अनेक छोटे बड़े संग़ठन बने हुए हैं। पर हम गौ भक्तों को सफलता नहीं मिल रही है। भारतीय गौ रक्षा दल समस्त गौ पुत्रों एवं गौ भक्तों का सम्लित प्रयासों के लिए आवाहन कर रहा है। आओ सब मिलकर इस यज्ञ में आहुति डालें। सभी देश भक्त " हर हर गाय -घर घर गाय " का नारा बुलंद करें। 
हमारा अभियान सर्वप्रथम दिल्ली से प्रारम्भ किया जायेगा। देश की राजधानी होने के कारण ये आवश्यक हैं कि सारे देश में गौ रक्षा का सन्देश दिल्ली से ही दिया जाए। इस के लिए हम सरकार तथा उपराज्यपाल से यह मांग करेंगे की दिल्ली में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगे।

दूसरें चरण में हम केंद्र सरकार से मांग करेंगे की गौ हत्या को भारतीय दंड सहिंता की धारा 302 के अंतर्गत लाया जाए। तथा गाय को राष्ट्र माता का सम्मान दिया जाये।

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