Saturday, 2 July 2016

Immoral Merger In Haryana


सत्ता में आते ही सभी राजनैतिक पार्टियों के संगठन के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के चारो ओर "दलाल" जुगाडू किस्म के चापलूस लोग हाथों में बड़े बड़े मोबाईल लिए ब्राण्डेड कपड़े पहने सोने से लदे हुए कीमती कारों के साथ एकाएक दिखाई देने लगते हैं। जिनका दूर -दूर तक राजनीति और पार्टी से कोई वास्ता ही नही होता है। और साधारण कार्यकर्ता जिसकी पैठ क्षेत्र के जनसामान्य में होने के बावजूद मेहनत,लगन व कर्मठता के कारण ही सत्ता प्राप्त करने की आस होती है। यकायक उसकी अनदेखी होने लगती है।जनसामान्य के कार्य के लिए भी उस जमीनी कार्यकर्ता को संगठन एवं सत्ताधीश नेता समय नहीं देते हैं सभी संगठन नेता भी अब उनको पहचानते ही नहीं हैं। ऐसे में वह साधारण कार्यकर्त्ता स्वयं को ठगा सा महसूस करता है। और कार्यकर्ता हतोउत्साहित हो जाता है संगठन के शीर्ष पदाधिकारी अब अचानक मठाधीश बन जाते हैं। इसी लिये सत्ता पर काबिज होने के बाद के चुनावों में पार्टियाँ पराजित होती हैं। और हाशिये पर आ जाती हैं फिर वह अपने जैसे पाखंडियों को अपने साथ मिलाती हैं। जैसा हरियाणा में हवा है। # क्या यह सही है

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